Urinary Incontinence: खांसते या छींकते समय निकल जाती हैं पेशाब की बूंदें? इसे न करें नजरअंदाज, हो सकती है यह गंभीर बीमारी
- byvarsha
- 22 Oct, 2026
PC: Navrashtra
लाइफस्टाइल में लगातार बदलाव, काम का बढ़ता स्ट्रेस, डाइट में बदलाव, नींद पूरी न होना, जंक फूड का ज़्यादा सेवन वगैरह कई चीज़ों का असर शरीर पर तुरंत दिखता है। अक्सर ज़ोर से हंसते, खांसते, छींकते या कोई भारी चीज़ उठाते समय अचानक पेशाब की बूंदें निकल आती हैं। यह समस्या महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों में भी देखी जाती है। बढ़ती उम्र, डिलीवरी के बाद या ब्लैडर के कमज़ोर होने की वजह से पेशाब से जुड़ी कई तरह की दिक्कतें होने लगती हैं। सभी महिलाएं काम की भागदौड़ में अपने शरीर का ध्यान रखना पूरी तरह से भूल जाती हैं। शरीर में दिखने वाले लक्षणों को हमेशा नज़रअंदाज़ कर देती हैं। नहीं तो, डॉक्टर की सलाह से समय पर इलाज करवाना ज़रूरी है। पेट के अंदर प्रेशर बढ़ाने वाली अचानक हरकतों से पेशाब लीक होने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में स्ट्रेस यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस कहते हैं।
महिलाओं में दिखने वाले मुख्य कारण:
यूरिन लीकेज महिलाओं और पुरुषों दोनों में देखी जाने वाली एक समस्या है। प्रेग्नेंसी और बच्चे के जन्म से पेल्विक फ्लोर पर बहुत ज़्यादा स्ट्रेस पड़ता है। नेचुरल चाइल्डबर्थ, बार-बार प्रेग्नेंसी, पेल्विक सर्जरी और मेनोपॉज़, शरीर में लगातार हार्मोनल बदलाव, बढ़ती उम्र, मोटापा, मांसपेशियों में कमज़ोरी वगैरह की वजह से यूरिनरी प्रॉब्लम होती हैं।
पुरुषों में दिखने वाले मुख्य कारण:
पुरुषों को मुख्य रूप से प्रोस्टेट सर्जरी या प्रोस्टेट ट्रीटमेंट के बाद यूरिनरी बदलाव महसूस होते हैं। पेल्विक सर्जरी, नर्वस सिस्टम की बीमारियाँ, स्फिंक्टर की कमज़ोरी वगैरह की वजह से यूरिन लीकेज होने की संभावना ज़्यादा होती है। अक्सर पुरुष इस प्रॉब्लम के बारे में बात करने से बचते हैं या शर्मिंदा महसूस करते हैं। लेकिन ऐसा करने से बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
यूरिन लीकेज के अलग-अलग प्रकार:
बार-बार पेशाब जाने की ज़रूरत।
पेशाब करते समय तेज़ जलन।
यूरिन में अचानक खून आना।
बार-बार यूरिन इन्फेक्शन।
अगर ब्लैडर का पूरी तरह खाली न होना जैसे लक्षण बार-बार दिखें, तो डॉक्टर की सलाह से इलाज करवाना बहुत ज़रूरी है।
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पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़:
स्ट्रेस यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस के लिए पेल्विक फ्लोर मसल्स की एक्सरसाइज़ बहुत असरदार होती हैं। इसके अलावा, कीगल एक्सरसाइज़ करने से पेशाब की दिक्कतें कम होती हैं। एक्सरसाइज़ से यूरिन का फ्लो बेहतर होता है, मसल्स सिकुड़ती और ढीली होती हैं। लेकिन यह एक्सरसाइज़ सही तरीके से करना ज़रूरी है। अगर लक्षण बढ़ने लगें, तो समय पर डॉक्टर से इलाज करवाना चाहिए। पेल्विक फ्लोर फिजियोथेरेपिस्ट और डॉक्टर से सही गाइडेंस लेकर गंभीर बीमारियों पर भी काबू पाया जा सकता है। साथ ही, वज़न कंट्रोल में रखना, पूरी नींद लेना, पौष्टिक खाना वगैरह भी उतने ही ज़रूरी हैं।






