Vastu Tips: घर की दहलीज पर बैठना क्यों माना जाता है अशुभ और वर्जित, इसे पढ़कर चौंक जाएंगे आप

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भारतीय ज्योतिष, आर्किटेक्चर और धार्मिक मान्यताओं में घर की चौखट या चौखट की खास जगह है। घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर बच्चों को चौखट पर बैठने से मना करते हैं। कई लोग इसे सिर्फ एक पुरानी परंपरा मानते हैं, लेकिन ज्योतिष और धार्मिक ग्रंथ कहते हैं कि इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक महत्व है। मशहूर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने भी चौखट से जुड़ी ऐसी ही मान्यताओं का ज़िक्र किया है, जो आज भी लाखों लोगों की मान्यताओं का हिस्सा हैं। अगर आपने कभी सोचा है कि ज़्यादा देर तक चौखट पर बैठना या खड़ा रहना अशुभ क्यों माना जाता है, तो इसके पीछे कई कारण हैं, सिर्फ़ सामाजिक नियम ही नहीं, बल्कि धार्मिक और वास्तु से जुड़े भी।

ऐसा माना जाता है कि चौखट वह जगह है जहाँ से घर की एनर्जी, देवी-देवताओं का आशीर्वाद और पॉजिटिव वाइब्रेशन अंदर आती हैं। इसलिए, इस जगह को सिर्फ़ एक आम जगह नहीं, बल्कि एक पवित्र सीमा माना जाता है। तो, आइए ज्योतिष, पौराणिक कथाओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार चौखट का महत्व जानें और इस जगह का खास सम्मान करने की सलाह क्यों दी जाती है।

दरवाजे की चौखट को पवित्र जगह क्यों माना जाता है?

ज्योतिष और सनातन परंपरा के अनुसार, घर की चौखट सिर्फ़ लकड़ी या पत्थर का टुकड़ा नहीं होती। इसे घर की एनर्जी और बाहर के बीच का गेटवे माना जाता है। यह एक ऐसी जगह है जहाँ से शुभ एनर्जी, सुख, समृद्धि और पॉजिटिविटी अंदर आती है। माना जाता है कि जिस घर की चौखट साफ़ और इज्ज़तदार रखी जाती है, उस पर देवी लक्ष्मी की कृपा लंबे समय तक बनी रहती है। इसीलिए कई घरों में रोज़ सुबह और शाम चौखट पर दीये जलाने और रंगोली बनाने की परंपरा होती है।

देवकीनंदन ठाकुर ने क्या कहा?

मशहूर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के अनुसार, घर की चौखट भगवान नरसिंह से जुड़ी होती है। वे कहते हैं कि चौखट पर बैठना गलत माना जाता है, क्योंकि इसे दैवीय शक्तियों का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान के अवतार या किसी महत्वपूर्ण दैवीय घटना से जुड़ी जगहों का अनादर या लापरवाही से बचना चाहिए। इसीलिए चौखट पर बैठना मना है।

भगवान नरसिंह और चौखट का रिश्ता

हिरण्यकश्यप के अंत की कहानी

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राक्षस राजा हिरण्यकश्यप को वरदान मिला था कि वह किसी के हाथों नहीं मारा जाएगा, चाहे घर के अंदर हो या बाहर, दिन हो या रात, इंसान हो या जानवर। तब भगवान विष्णु ने नरसिंह का अवतार लिया। शाम को उन्होंने हिरण्यकश्यप को घर की चौखट पर बैठाया और अपने नाखूनों से उसे मार डाला। चौखट पूरी तरह से घर के अंदर या बाहर नहीं थी, इसलिए वरदान की सभी शर्तें खत्म हो गईं। इस घटना के बाद, चौखट को एक पवित्र और पवित्र जगह माना जाने लगा। ज्योतिषियों का मानना ​​है कि चौखट पर बैठना इस पवित्रता के सम्मान के खिलाफ माना जाता है।

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ज्योतिष के अनुसार चौखट का क्या महत्व है?

ज्योतिष के अनुसार, घर का मेन दरवाज़ा और चौखट राहु, केतु और दूसरे ग्रहों के बुरे असर को रोकने वाली जगह मानी जाती है। कई ज्योतिषी कहते हैं कि घर का एंट्रेंस एक बड़ा एनर्जी सेंटर होता है। ज़्यादा देर तक दहलीज़ पर बैठने या उसे गंदा रखने से पॉज़िटिव एनर्जी का फ्लो रुक सकता है। हालांकि यह बात आस्था पर आधारित है, फिर भी बहुत से लोग इसे गंभीरता से लेते हैं।

शाम का समय खास तौर पर क्यों ज़रूरी माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूरज डूबने के बाद का समय बहुत सेंसिटिव माना जाता है। कहा जाता है कि इस समय देवी लक्ष्मी घरों में आती हैं। दरवाज़े पर बैठना उनके रास्ते में रुकावट माना जाता है। इसी वजह से, कई परिवार शाम को दरवाज़े पर न बैठने, झाड़ू न रखने या गंदगी जमा न होने देने की सलाह देते हैं। माना जाता है कि इससे घर में सुख, शांति और धन का फ्लो बना रहता है।